लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह राठौड़ - वो राजपूत योद्धा जिसने कभी कोई युद्ध नहीं हारा*

 

लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह राठौड़ - वो राजपूत योद्धा जिसने कभी कोई युद्ध नहीं हारा*


आज का लेख है भारत के सबसे निर्भीक, सबसे बेहतरीन फील्ड कमांडर की।

6 फुट 3 इंच का वो सवा-छह फुटी राजपूत, जिसकी आँख में देखते ही दुश्मन की रूह कांप जाती थी।


वो जनरल जिसने पाकिस्तान को पटकनी देकर बांग्लादेश बनाया। 1971 विजय के असली हीरो। जिसे अमेरिकी सेना के जनरल पैटन और जर्मन सेना के रोमेल के बराबर माना जाता है।


कौन थे जनरल सगत सिंह? एक अनसुनी दास्तां -


1. गोवा को 36 घंटे में आजाद कराने वाला जाबांज:-

1961 में जब 50 पैराशूट ब्रिगेड की कमान उन्हें दी गई, वो पैराट्रूपर भी नहीं थे। उम्र 40 साल से ऊपर। लेकिन सम्मान के लिए एक दिन में 2-2 जंप लेकर विंग्स हासिल किए। गोवा ऑपरेशन में 36 घंटे में पंजिम पर कब्जा कर लिया। पुर्तगाल में उनके पोस्टर लगे थे - "जो पकड़ कर लाएगा, 10,000 डॉलर इनाम!"


2. जिसने 1962 के बाद चीन को पहला घाव दिया:-

नाथूला में जब चीनियों ने हमारे CO पर गोली चलाई, जनरल सगत ने मीडियम आर्टिलरी मंगवा कर ऐसा जवाब दिया कि 300 चीनी मारे गए। सेना के जवानों के दिल से 1962 का डर हमेशा के लिए खत्म कर दिया। इतिहास में लिखा गया - "पहली बार हमने चीन को Bloody Nose दिया।"


3. उड़ता हुआ जनरल - The Flying General:-

1971 युद्ध में त्रिपुरा में कोई सड़क, कोई पुल नहीं। एक लाख सैनिक, 30,000 टन सामान, 5000 गाड़ियां लानी थीं। शरणार्थियों की मदद से उन्होंने असंभव को संभव किया।


रोज सुबह 6 बजे हेलिकॉप्टर से युद्ध का जायजा लेते थे। एक बार मेघना नदी पर उनके हेलिकॉप्टर पर मशीनगन से हमला हुआ, 64 सुराख हो गए, पायलट घायल, खून के छींटे... फिर भी दूसरे हेलिकॉप्टर से फिर उड़ गए।


और फिर वो कर दिखाया जो दुनिया के सैन्य इतिहास में आज तक नहीं हुआ - 4 किलोमीटर चौड़ी मेघना नदी को हवाई पुल से पार कर दिया। रात में MI-4 हेलिकॉप्टर लैंड नहीं होते थे, तो खाली दूध के डिब्बों में केरोसिन डालकर रोशनी की और पूरी ब्रिगेड पार उतार दी।


जब पूर्वी कमान ने मेघना पार न करने का आदेश दिया, तो उन्होंने गुस्से में कहा था - "मेरा कोई सैनिक वापस नहीं लौटेगा, OVER MY DEAD BODY" और सीधे ढाका पहुंच गए।


इतना सब करने के बाद भी इस महावीर को कोई वीरता पुरस्कार नहीं मिला, प्रमोशन तक नहीं दिया गया, सिर्फ पद्म भूषण से संतोष करना पड़ा। क्योंकि वो चापलूस नहीं, सच्चा सैनिक था, जो गलत आदेश को मानने से इंकार कर देता था।

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