अरावली राजस्थान के इतिहास और पहचान का गौरव है

 अरावली राजस्थान के इतिहास और पहचान का गौरव है, जो न केवल दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है बल्कि राज्य की जीवनरेखा भी है, जिसने थार रेगिस्तान को फैलने से रोका, नदियों (जैसे बनास, लूनी, साबरमती) को जन्म दिया और सदियों तक राजपूतों के लिए प्राकृतिक ढाल बनकर उनकी संस्कृति और विरासत को सहेजने में मदद की है, जिससे यह राजस्थान के भू-भाग, संस्कृति और इतिहास का एक अभिन्न अंग बन जाती है. 

अरावली: राजस्थान के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक

1. प्राचीन विरासत और भू-संरचना:

विश्व की सबसे प्राचीन पर्वतमाला: अरावली विश्व की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जिसका निर्माण करोड़ों वर्ष पूर्व हुआ था, जो इसे पृथ्वी के इतिहास का एक जीवंत प्रमाण बनाता है.

राजस्थान की जीवनरेखा: यह पर्वतमाला राजस्थान को उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम में दो भागों में बांटती है और थार मरुस्थल के विस्तार को रोककर राज्य की जलवायु को नियंत्रित करती है, जिससे यहाँ जीवन संभव हो पाया है. 

2. सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व:

राजपूतों की ढाल: अरावली ने सदियों तक राजपूतों को बाहरी आक्रमणों से बचाया, उनके किलों (जैसे कुंभलगढ़) और संस्कृति को सुरक्षित रखा, जिससे यह उनकी वीरता और स्वाभिमान का प्रतीक बन गई.

नदियों का उद्गम स्थल: यह बनास, लूनी, साबरमती, और साहिबी जैसी महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम स्थल है, जो राजस्थान और गुजरात के लिए जल का स्रोत हैं.

आदिवासी संस्कृति: अरावली के आसपास भील और अन्य जनजातियाँ सदियों से निवास करती रही हैं, जिनकी संस्कृति और जीवनशैली पहाड़ों से जुड़ी हुई है. 

3. पर्यावरणीय और सामरिक भूमिका:

हरित फेफड़े (Green Lungs): दिल्ली-NCR और उत्तरी भारत के लिए अरावली "ग्रीन लंग्स" की तरह काम करती है, जो प्रदूषण को कम करती है.

जैव विविधता: यह विभिन्न वन्यजीव अभयारण्यों (सरिस्का, कुंभलगढ़, माउंट आबू) का घर है और कई प्रजातियों को आश्रय देती है. 

4. वर्तमान स्थिति और चुनौती:

अरावली आज अवैध खनन, अतिक्रमण और शहरीकरण के कारण खतरे में है, जो राजस्थान के भविष्य और उसके इतिहास के इस अनमोल धरोहर के लिए एक गंभीर चुनौती है. 

अरावली सिर्फ़ पहाड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की पहचान, उसकी संस्कृति, इतिहास और पारिस्थितिकी का अटूट हिस्सा है, जिसे सहेजना हम सबकी जिम्मेदारी है. 

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